सावधानी हटी चूत फटी 11

लेखक – कपिल
सम्पादिका – मस्त कामिनी
रघुनाथ पांडेय ने आशा के चुत्तड अपने हाथों में थाम लिए और तेज़ी से चोदने लगा..
अब आशा बोली – रघु जी, पता है औरत को कैसे चुदने में मज़ा आता है.. ?? जब मर्द, उस पर चढ़ कर उसे चोदता है.. मैं आपके लण्ड की सवारी कर रही हूँ.. मुझे ऐसे भी बहुत मज़ा आ रहा है.. पर आपका स्थान, मुझसे ऊपर है.. जहाँ तक चुदाई का सवाल है, मैं उसी तरह से चुदाई करवाती रहूंगी, जैसे आप कहेंगे.. जिससे भी आप कहेंगे.. लेकिन, मुझे चुदाई के असली मज़े का एहसास तभी होता है, जब आप अपनी आशा बेटी को ऊपर चढ़ कर चोदते हैं.. बाबूजी, अब ज़ोर से चोदो मुझे.. प्लीज़, बाबू जी..
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रघुनाथ पांडेय ने अपनी एक उंगली आशा की गाण्ड में पेल डाली और आशा चिहुंक उठी – आआआआआहहहहहहहहहह ह ह ह ह ह मा द र चो द द द.. धी रे.. अब मेरी गाण्ड भी चोदेगा.. चूत तो मार ले, पहले.. अहंह.. गाण्ड भी मार ले, रघु.. आ आ ह हह.. दर्द होता है, लेकिन तेरे लिए, मैं कितना भी दर्द झेल लूँगी..
अब रघुनाथ पांडेय ने आशा के कंधे पर काट खाया और ज़ोर से चूमने लगा और तेज़ी से उंगली भी गाण्ड में पेलने लगा..
वो हाँफते हुए बोला – मेरी प्यारी बिटिया रानी.. चिंता मत कर.. तुझे नीचे डाल कर भी चोदूंगा.. पहले तू तो मुझे चोद ले.. फिर तुझे अपनी रंडी की तरह ऊपर चढ़ कर भी चोद दूँगा.. इस बुड्ढे लण्ड में अभी भी बहुत जान बाकी है, छीनाल.. आज तो मैं तेरी गाण्ड भी चोदना चाहता हूँ, रांड़.. कितनी मस्त है, तेरी गाण्ड.. ओह!! कितना मज़ा दे रही है तू मुझे, माँ की लौड़ी..
दोनों पागलों की तरह चुदाई में मस्त थे..
मेरा लण्ड बेकाबू हो चुका था..
मैंने अपनी पैंट खोल कर अपना लण्ड हाथ में ले लिया और अपनी मुँह बोली माँ की चुदाई देखते हुए, मूठ मारने लगा..
आशा के गोरे गोरे चुत्तड ऊपर नीचे होते हुए बहुत मस्त लग रहे थे और वो चिल्ला रही थी – चोद.. ज़ोर से.. और ज़ोर से.. फाड़ डाल, मेरी चूत.. पेल अपनी रंडी बेटी को, मेरे भडुए बाप.. ना जाने किस किस से चुद्वा चुका है, अब तक अपना मतलब निकालने के लिए, मेरे दल्ले..
अचानक, रघुनाथ पांडेय रुक गये और आशा के कान को चूमते हुए बोले – मेरी छीनाल, अब तुझ पर सवारी करने का वक्त आ गया है.. मेरे नीचे लेट कर चुदेगी.. ??
आशा नटखट अंदाज़ में बोली – जल्दी से चोद राजा, पहले ही चूत जल रही है.. पचासों लण्ड खा कर और भी भूख बढ़ चुकी है, इसकी.. काले पीले, लंबे मोटे, आड़े तिरछे, ना जाने कितने लण्ड से चुद्वा चुका है, तू मुझे.. पूरी चुड़दक़्कड़ बना दिया है, तूने मेरी चूत को.. अब ऊपर चढ़ कर, चोद डाल मुझे..
रघुनाथ पांडेय ने आशा को घोड़ी बनाने को कहा – क्या.. ?? घोड़ी बनूँ.. ??
रघु हंस पड़ा और बोला – औरत और घोड़ी में क्या फराक है.. दोनों ही सवारी के काम आती हैं.. औरत की लंबी चोटी घोड़ी की लगाम के बराबर होती है.. मैं तुझे पीछे से चोदना चाहता हूँ.. तेरी मस्त गाण्ड, देखते हुए..
आशा उसी वक्त, पलंग पर झुकती हुई बोली – जैसा आप कहें, मेरे सरकार.. चुदना है तो नखरा, कैसा.. लण्ड पेल डालो, मेरी प्यासी चूत में जल्दी से.. मैं आपके लिए घोड़ी तो क्या कुतिया भी बन सकती हूँ..
जैसे ही आशा आगे झुकी, रघु ने पीछे से लण्ड का वार किया और आशा के चुत्तड की दरार से होता हुआ लण्ड, उसकी चूत में प्रवेश कर गया..
रघु ने अपनी रखैल की चोटी को कस के पकड़ लिया और ऐसे चोदने लगा, जैसे वो घोड़ी हांक रहा हो..
रघु के अंडकोष ज़ोर ज़ोर से आशा की गाण्ड से टकराने लगे..
दोनों अब तक पसीने से भीग चुके थे..
कमरा फ़चा फ़च की आवाज़ों से गूंजने लगा..
मेरा हाथ भी तेज़ी से मेरे लण्ड के ऊपर नीचे चलने लगे..
आशा का नंगा जिस्म, मुझे बहुत उतेज़ित कर रहा था..
इससे ज़्यादा मज़ा, मुझे उसकी चुदाई देखने में आ रहा था..
आशा अपने चुत्तड रघु के लण्ड पर ज़ोर ज़ोर से मार रही थी..
मेरा लण्ड झड़ने के करीब था पर रघु उसे चोदे ही जा रहा था..
मानना पड़ेगा, बूढ़ी हड्डियों में बहुत जान बाकी थी..
रघुनाथ पांडेय, आशा के चुत्तड नोच रहा था और हाँफते हुए चुदाई में मस्त था..
कुछ देर बाद वो बोला – आशा बेटी, मैं झड़ रहा हूँ.. तेरी जैसी मस्त औरत मैंने कभी नहीं देखी.. तू बहुत मस्ती से चुदवाती है, रानी.. अहस.. मैं गया.. आ शा शा..
आशा भी मस्ती से भरी हुई थी..
तभी मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी..
मेरे लण्ड रस की धार भी बहुत दूर तक गई और अपने हाथों पर मुझे अपने लण्ड का रस महसूस हुआ..
आख़िरी बारी अपनी मुँह बोली माँ के नंगे जिस्म को देखते हुए, मैं अंकिता के कमरे की तरफ लौट पड़ा..
मेरी यह कहानी काफी लम्बी है और मेरी सेक्स स्टोरी की अन्य कहानियों की तरह ही, कड़ियों में प्रकाशित होगी..
मुझे पूरा विश्वास है, कहानी आपको पसंद आ रही होगी..
कामिनी जी, कहानी को अपनी साइट पर प्रकाशित करने का, आपका बहुत बहुत धन्यवाद..
जल्द ही, अगली कड़ी पेश करूँगा..
कपिल

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