चुदाई का सफर: शिमला में चूत पर हमला 1

लेखिका – कशिश
अनुवाद तथा संपादन – मस्त कामिनी
हमने – मैंने और मेरे पति ने, अपनी छुट्टियां शिमला मे मानने का निशेय किया।
मेरे पति ने वहाँ, शिमला मे.. हमारे रहने के लिए, एक बंगला किराए पर ले लिया था..
हम दोनों बहुत ही खुश थे और शिमला के ठंडे और खूबसूरत मौसम मे, साथ साथ समय बिताने और मज़ेदार चुदाई करने के लिए बेताब थे।
हम पहले भी वहाँ जा चुके थे पर उस वक़्त, हम एक होटेल मे रुके थे।
इस बार, ज़्यादा मज़े के लिए, ज़्यादा एकांत के लिए और ज़्यादा चुदाई के लिए, हमने बंगला बुक किया था.. !!
हम वहाँ, शाम के वक़्त पहुँचे।
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हमारा विचार, वहाँ दो दिन तक रहने का था।
मेरे पति ने बंगले के सामने, कार रोकी और निश्चित किया की हम सही जगह पहुँचे हैं..
हम कार से निकले तो ठंडी हवा का झोंका, हमारे बदन से टकराया।
मेरे पति, तब तक बंगले के दरवाजे तक पहुँच चुके थे और जेब से चाबी निकाल कर उसका दरवाजा खोल चुके थे।
मैं थोड़ा रुकी और फिर अपना बेग उठाए, बंगले की तरफ बढ़ी..
मेरे पति वहाँ, बंगले के दरवाजे पर खड़े मुझे ही देख रहे थे।
मैं भी उनकी तरफ देखते हुए, आगे बढ़ रही थी।
वो मुस्कराए और उन्होंने, मुझे अंदर आने का इशारा किया।
जब मैं उनके बगल से गुज़री तो मेरे खुले बाल, उनके चेहरे से टकराए..
उन्होंने मेरे बालों को, लंबी साँस ले कर सूँघा।
दरवाजा बंद कर के वो भी अंदर आ गए।
हम बाहरी कमरे मे थे, जहाँ उन्होंने मुझे बैठने को कहा।
मैं वहाँ रखे सोफे पर बैठ गई और चारों तरफ देखने लगी।
वो एक बहुत ही खूबसूरत, सॉफ सुथरे और अच्छे रख रखाव वाला, रहने के लिए तैयार बंगला था।
वो भी मेरे पास बैठे और मुझे बाहों मे भर लिया..
हमेशा की तरह, उनकी मज़बूत बाहों मे आ कर, मैं सब कुछ भूल गई।
आख़िर, मैंने चुप्पी तोड़ी और मैं बोली की मुझे यहाँ पहुँच कर, इस खूबसूरत मौसम मे बहुत अच्छा लग रहा है.. !!
उन्होंने अपनी आँखें मटकाई और बोले की उनको कुछ करना है.. !! और उन्होंने मुझे फिर से खींच कर अपनी बाहों मे जकड़ लिया..
एक दूसरे को बाहों मे जकड़े, हम अपनी थकान मिटाने लगे..
ऐसा लग रहा था, जैसे हम दोनों के जिस्म एक दूसरे की गरमी से पिघल जाएँगे।
मेरी चुचियाँ, उनके चौड़े सीने मे दब रही थीं।
चुदाई की गरमी हमारे सिर पर, सवार हो चुकी थी।
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हमारे हाथ, एक दूसरे का बदन टटोलने लगे और मेरा हाथ, जब उनकी पैंट के सबसे खास हिस्से पर पहुँचा तो मैंने उनका चुदाई का औज़ार, उनके लंबे लौड़े को पैंट के अंदर खड़े हो कर, हलचल मचाते पाया..
मैंने अपनी नरम उंगलियों से, जैसे उनके लण्ड को मालिश की..
उनके दोनों हाथों मे, मेरी दोनों चुचियाँ आ चुकी थीं.. जिसे वो, मेरे टी शर्ट के ऊपर से ही मसलने और दबाने लगे.. जिस से, मैं और भी गरम हो गई..
उन्होंने अपने गरम होंठ, मेरे गरम होंठों पर रखे और हम एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए चुंबन करने लगे..
मैंने उनके पैंट की ज़िप खोलते हुए, उनके लंबे लौड़े को बाहर निकाला तो वो जैसे मेरे हाथ मे नाचने लगा।
मैं उनका लण्ड पकड़ कर, हिलाने लगी..
उन्होंने अपने काँपते हाथों से, मेरी टी शर्ट उतार दी।
मेरी गोल गोल चुचियाँ, मेरी काली ब्रा से झाँकने लगीं।
जब उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोला तो मेरी ब्रा मे क़ैद दोनों चुचियाँ आज़ाद हो कर बाहर निकल आईं।
उनके हाथों ने तुरंत ही, मेरी नंगी चूचीयों को पकड़ लिया और दबाने लगे।
मैं उनका लण्ड पकड़ कर, हिला रही थी और वो मेरी चुचियाँ दबा रहे थे तो हम दोनों के मुंह से आनंद भरी आवाज़ें निकालने लगी।
मेरे हाथ की पकड़, उनके तने हुए लौड़े पर और मज़बूत हुई और मैं उसको आगे पीछे करने लगी..
उनके लण्ड के छेद से गरमी का रस निकलने लगा।
उन्होंने आगे हो कर, मेरी चूची को मुंह मे लिया और मेरी निप्पल पर अपनी जीभ फिराई।
मेरी दोनों निप्पलें तन कर, खड़ी हो गई।
वो मेरी चूची और निप्पल चूस रहे थे और मैं उनका लण्ड पकड़ कर, मुठिया मार रही थी।
यहाँ मैं आप को बता दूं की रास्ते मे, वहाँ आते समय, मैं काफ़ी देर तक, बार बार, कार मे उनके लण्ड से खेलती रही थी.. जिसकी वजह से, वो पहले से ही काफ़ी गरम थे..
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मैंने उनके लण्ड पर, ज़ोर ज़ोर से मूठ मारनी शुरू की ताकि उनके लण्ड का पानी निकल जाए..
मैंने उनके बदन मे, हलचल महसूस की और मुझे पता चल गया की उनके लण्ड से लण्ड रस की बौछार होने वाली है।
मैं और ज़ोर ज़ोर से, और कस कर, और जल्दी जल्दी अपना हाथ चलती गई और अचानक ही, उनके लण्ड ने अपने प्रेम रस की बौछार करनी शुरू कर दी।
मैं तब तक उनके लण्ड को हिलती हुई आगे पीछे, ऊपर नीचे करती रही जब तक की उनके लण्ड के पानी की आख़िरी बूँद नहीं निकल गई..
मेरा हाथ और नंगा पेट, उनके लण्ड से बरसाए रस से गीले हो गये थे..
वो सोफे पर पीठ टीका कर, बैठ गये और लंबी लंबी साँसे लेने लगे..
मैं उनकी गोदी मे सो गई… …
सफर जारी है… …
अपने सुझाव और राय भेजना बंद मत कीजियेगा।
धन्यवाद..
लव यु आल..
सेक्सी कशिश.. ..

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